गणेश चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त, व्रत & पूजा विधि
Ganesh Chaturthi 2026: Date, Significance, Puja Vidhi & Rituals
नमस्ते दोस्तों! भारत त्योहारों का देश है, और जब बात 'विघ्नहर्ता' श्री गणेश की हो, तो उत्साह दु गुना हो जाता है।संकष्टी चतुर्थी, जिसे हम 'संकट चौथ' भी कहते हैं, हर माह की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज के 2026 के डिजिटल और फास्ट-पेस्ड युग में, ये प्राचीन परंपराएं हमारे लिए क्यों ज़रूरी हैं?इस ब्लॉग में हम बात करेंगे कि कैसे आप घर बैठे,अपने बिजी शेड्यूल के बीच भी बप्पा को प्रसन्न कर सकते हैं और अपने जीवन के संकटों को दूर कर सकते हैं।
2. संकष्टी चतुर्थी क्या है?
'संकष्टी' का अर्थ होता है 'संकटों से मुक्ति दिलाने वाली'। भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। पुराणों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन निष्ठा से व्रत रखता है, उसके जीवन की बाधाएं खत्म हो जाती हैं।
चैत्र मास की कृष्ण चतुर्थी को विकट संकष्टी मनाई जाती है, जो भगवान गणेश के अष्टविनायक 'विकट' स्वरूप को समर्पित है। यह व्रत ज्ञात-अज्ञात भय, रोग और संकटों से मुक्ति दिलाकर भक्त को निर्भय और अपराजेय बनाता है। मुद्गल पुराण के अनुसार, विशालकाय 'मयूरेश' रूप धारण कर भगवान विकट ने मयूर पर आरूढ़ होकर अहंकारी कामासुर दैत्य का अंत किया था। उनकी गदा के एक ही प्रहार से परास्त होकर असुर उनकी शरण में आ गया, जिससे समस्त लोकों को भय से मुक्ति मिली; इसीलिए कठिन परिस्थितियों में साहस पाने के लिए इनकी पूजा अचूक मानी जाती है।
आज के संदर्भ में:
आज के समय में 'संकट' सिर्फ दुश्मन या बीमारी नहीं है। आज संकट है—मेंटल स्ट्रेस, करियर की चिंता, और डिजिटल डिस्ट्रैक्शन । संकष्टी का व्रत हमें सेल्फ-डिसिप्लिन और फोकस सिखाता है।
3. कब है संकष्टी चतुर्थी
-विकट संकष्टी चतुर्थी रविवार, अप्रैल 5, 2026 को
Krishna Dashami संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 21:58
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 05, 2026 को 11:59 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - अप्रैल 06, 2026 को 14:10 बजे
-एकदन्त संकष्टी चतुर्थी मंगलवार, मई 5, 2026 को
Krishna Dashami संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 22:35
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - मई 05, 2026 को 05:24 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - मई 06, 2026 को 07:51 बजे
-विभुवन संकष्टी चतुर्थी बुधवार, जून 3, 2026 को
Krishna Dashami संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 22:04 से 22:43, जून 04
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - जून 03, 2026 को 21:21 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - जून 04, 2026 को 23:30 बजे
-कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार, जुलाई 3, 2026 को
Krishna Dashami संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 21:53
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - जुलाई 03, 2026 को 11:20 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - जुलाई 04, 2026 को 12:39 बजे
-गजानन संकष्टी चतुर्थी रविवार, अगस्त 2, 2026 को
Krishna Dashami संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 21:24
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 01, 2026 को 23:07 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - अगस्त 02, 2026 को 23:15 बजे
-बोल चौथ सोमवार, अगस्त 31, 2026 को
गोधुली पूजा मुहूर्त - 18:31 से 18:57
बोल चौथ के दिन चन्द्रोदय - 20:29
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 31, 2026 को 08:50 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - सितम्बर 01, 2026 को 07:41 बजे
-विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी मंगलवार, सितम्बर 29, 2026 को
Krishna Dashami संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 19:44
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - सितम्बर 29, 2026 को 17:09 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - सितम्बर 30, 2026 को 14:55 बजे
-करवा चौथ बृहस्पतिवार, अक्टूबर 29, 2026 को
करवा चौथ पूजा मुहूर्त - 17:38 से 18:56,चन्द्रोदय - 20:17
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 29, 2026 को 01:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - अक्टूबर 29, 2026 को 22:09 बजे
-गणाधिप संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार, नवम्बर 27, 2026 को
Krishna Dashami संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 20:18
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - नवम्बर 27, 2026 को 09:48 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - नवम्बर 28, 2026 को 06:39 बजे
-अखुरथ संकष्टी चतुर्थी शनिवार, दिसम्बर 26, 2026 को
Krishna Dashami संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 20:19
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - दिसम्बर 26, 2026 को 20:04 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - दिसम्बर 27, 2026 को 17:12 बजे
4. व्रत विधि:
पहले के ज़माने में लोग पूरा दिन मंदिर में बिताते थे, लेकिन आज हमें ऑफिस और घर दोनों देखना है।
पूजा की शुरुआत स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर दीप प्रज्वलित करने से करें।
एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें और अक्षत, सिंदूर व हल्दी से उनका तिलक करें।
भगवान को उनके प्रिय 5 या 11 दूर्वा, लाल फूल और जनेऊ अर्पित करें।
भोग में मोदक, लड्डू और फल चढ़ाएं और साथ ही रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक स्वरूप दो सुपारियां भी रखें।
इसके बाद 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का 108 बार श्रद्धापूर्वक जाप करें।
अंत में कपूर से आरती कर पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
यह सरल विधि भक्तों को मानसिक शांति और कार्यों में सिद्धि प्रदान करती है।
भगवान गणेश के 108 नाम
यहाँ भगवान गणेश के 108 नाम और उनके मंत्र दिए गए हैं:
गजानन - ॐ गजाननाय नमः।
गणाध्यक्ष - ॐ गणाध्यक्षाय नमः।
विघ्नराज - ॐ विघ्नराजाय नमः।
विनायक - ॐ विनायकाय नमः।
द्वैमातुर - ॐ द्वैमातुराय नमः।
द्विमुख - ॐ द्विमुखाय नमः।
प्रमुख - ॐ प्रमुखाय नमः।
सुमुख - ॐ सुमुखाय नमः।
कृति - ॐ कृतिने नमः।
सुप्रदीप - ॐ सुप्रदीपाय नमः।
सुखनिधि - ॐ सुखनिधये नमः।
सुराध्यक्ष - ॐ सुराध्यक्षाय नमः।
सुरारिघ्न - ॐ सुरारिघ्नाय नमः।
महागणपति - ॐ महागणपतये नमः।
मान्य - ॐ मान्याय नमः।
महाकाल - ॐ महाकालाय नमः।
महाबल - ॐ महाबलाय नमः।
हेरम्ब - ॐ हेरम्बाय नमः।
लम्बजठर - ॐ लम्बजठराय नमः।
ह्रस्वग्रीव - ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः।
महोदर - ॐ महोदराय नमः।
मदोत्कट - ॐ मदोत्कटाय नमः।
महावीर - ॐ महावीराय नमः।
मन्त्रिणे - ॐ मन्त्रिणे नमः।
मंगल स्वर - ॐ मंगल स्वराय नमः।
प्रमथ - ॐ प्रमथाय नमः।
प्रथम - ॐ प्रथमाय नमः।
प्रज्ञ - ॐ प्रज्ञाय नमः।
विघ्नकर्ता - ॐ विघ्नकर्त्रे नमः।
विघ्नहर्ता - ॐ विघ्नहर्त्रे नमः।
विश्वनेत्र - ॐ विश्वनेत्रे नमः।
विराट्पति - ॐ विराट्पतये नमः।
श्रीपति - ॐ श्रीपतये नमः।
वाक्पति - ॐ वाक्पतये नमः।
शृंगारिन - ॐ शृंगारिणे नमः।
आश्रितवत्सल - ॐ आश्रितवत्सलाय नमः।
शिवप्रिय - ॐ शिवप्रियाय नमः।
शीघ्रकारिन - ॐ शीघ्रकारिणे नमः।
शाश्वत - ॐ शाश्वताय नमः।
बल - ॐ बलाय नमः।
बलोत्थिताय - ॐ बलोत्थिताय नमः।
भवात्मजाय - ॐ भवात्मजाय नमः।
पुराण पुरुष - ॐ पुराण पुरुषाय नमः।
पूष्णे - ॐ पूष्णे नमः।
पुष्करोत्क्षिप्त वारिणे - ॐ पुष्करोत्क्षिप्त वारिणे नमः।
अग्रगण्याय - ॐ अग्रगण्याय नमः।
अग्रपूज्याय - ॐ अग्रपूज्याय नमः।
अग्रगामिने - ॐ अग्रगामिने नमः।
मंत्रकृते - ॐ मंत्रकृते नमः।
चामीकरप्रभाय - ॐ चामीकरप्रभाय नमः।
सर्व - ॐ सर्वाय नमः।
सर्वोपास्याय - ॐ सर्वोपास्याय नमः।
सर्वकर्त्रे - ॐ सर्व कर्त्रे नमः।
सर्वनेत्रे - ॐ सर्वनेत्रे नमः।
सर्वसिद्धिप्रदाय - ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः।
सिद्धये - ॐ सिद्धये नमः।
पञ्चहस्ताय - ॐ पञ्चहस्ताय नमः।
पार्वतीनन्दनाय - ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः।
प्रभवे - ॐ प्रभवे नमः।
कुमारगुरवे - ॐ कुमारगुरवे नमः।
अक्षोभ्याय - ॐ अक्षोभ्याय नमः।
कुञ्जरासुर भञ्जनाय - ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः।
प्रमोदाय - ॐ प्रमोदाय नमः।
मोदकप्रियाय - ॐ मोदकप्रियाय नमः।
कान्तिमते - ॐ कान्तिमते नमः।
धृतिमते - ॐ धृतिमते नमः।
कामिने - ॐ कामिने नमः।
कपित्थपनसप्रियाय - ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः।
ब्रह्मचारिणे - ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।
ब्रह्मरूपिणे - ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः।
ब्रह्मविद्यादि दानभुवे - ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः।
जिष्णवे - ॐ जिष्णवे नमः।
विष्णुप्रियाय - ॐ विष्णुप्रियाय नमः।
भक्त जीविताय - ॐ भक्त जीविताय नमः।
जितमन्मथाय - ॐ जितमन्मथाय नमः।
ऐश्वर्यकारणाय - ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः।
ज्यायसे - ॐ ज्यायसे नमः।
यक्ष किन्नरसेविताय - ॐ यक्ष किन्नरसेविताय नमः।
गंगा सुताय - ॐ गंगा सुताय नमः।
गणाधीशाय - ॐ गणाधीशाय नमः।
गम्भीर निनादाय - ॐ गम्भीर निनादाय नमः।
वटवे - ॐ वटवे नमः।
अभीष्टवरदाय - ॐ अभीष्टवरदाय नमः।
ज्योतिषे - ॐ ज्योतिषे नमः।
भक्तनिधये - ॐ भक्तनिधये नमः।
भावगम्याय - ॐ भावगम्याय नमः।
मंगलप्रदाय - ॐ मंगलप्रदाय नमः।
अव्यक्ताय - ॐ अव्यक्ताय नमः।
अप्राकृत पराक्रमाय - ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः।
सत्यधर्मिणे - ॐ सत्यधर्मिणे नमः।
सखाये - ॐ सखाये नमः।
सरसाम्बुनिधये - ॐ सरसाम्बुनिधये नमः।
महेशाय - ॐ महेशाय नमः।
दिव्यांगाय - ॐ दिव्यांंगाय नमः।
मणिकिङ्किणी मेखलाय - ॐ मणिकिङ्किणी मेखलाय नमः।
समस्त देवता मूर्तये - ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः।
सहिष्णवे - ॐ सहिष्णवे नमः।
सततोत्थिताय - ॐ सततोत्थिताय नमः।
विघातकारिणे - ॐ विघातकारिणे नमः।
विश्वग्दृशे - ॐ विश्वग्दृशे नमः।
विश्वरक्षकृते - ॐ विश्वरक्षकृते नमः।
कल्याणगुरवे - ॐ कल्याणगुरवे नमः।
उन्मत्तवेषाय - ॐ उन्मत्तवेषाय नमः।
अपराजिते - ॐ अपराजिते नमः।
समस्त जगदाधाराय - ॐ समस्त जगदाधाराय नमः।
सर्वैश्वर्यप्रदाय - ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः।
आक्रान्त चिदा चित्प्रभवे - ॐ आक्रान्त चिदा चित्प्रभवे नमः।
श्री विघ्नेश्वराय - ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः।
5. वर्क-लाइफ बैलेंस :
अगर आप ऑफिस में हैं, तो ज़रूरी नहीं कि आप कड़ी तपस्या करें। आप 'फलाहार' पर रह सकते हैं।
6.डिजिटल फास्टिंग :
इस दिन कोशिश करें कि सोशल मीडिया पर कम समय बिताएं और 'ॐ गं गणपतये नमः' का मानसिक जप करें। आप PoojaKaro प्लेटफॉर्म से जुड़कर वर्चुअल भजन और सेवा में जुड़ सकते हैं।
7. शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय
संकष्टी चतुर्थी में चंद्रमा का बहुत महत्व है। व्रत तभी पूरा होता है जब आप चाँद को देखकर अर्घ्य देते हैं।
8. क्या खाएं और क्या नहीं?
क्या खाएं: साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू की पूरी, मखाना, दही और फल।
क्या न खाएं: तामसिक भोजन, चावल और गेहूं।
आप 'एनर्जी बॉल्स' खा सकते हैं ताकि ऑफिस में एनर्जी बनी रहे।
9. डिजिटल पूजा: एक नई सोच
आज के दौर में अगर आप मंदिर नहीं जा सकते, तो:
वर्चुअल दर्शन : कई बड़े मंदिरों के दर्शन PoojaKaro ऐप पर देखें।
दान : किसी गरीब बच्चे की शिक्षा या खाने के लिए दान करें ,बप्पा के लिए ये सबसे बड़ी सेवा है। अगर आपके पास समय कम है तो ऐसे में पूजाकरो आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
10. निष्कर्ष
संकष्टी चतुर्थी सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि अपने अंदर के विश्वास को जगाने का दिन है। बप्पा हमें सिखाते हैं कि सिर बड़ा रखो और कान बड़े रखो।
इस बार जब आप पूजा करें, तो सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की शांति के लिए प्रार्थना करें।
गणपति बप्पा मोरया!








