हनुमान अष्टक (Hanuman Ashtak): पाठ, अर्थ, पूजा विधि और लाभ

हनुमान अष्टक क्या है
हनुमान अष्टक( Hanuman Ashtak) की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने 16वीं शताब्दी में की थी। हनुमानाष्टक में कुल मिलाकर 8 पद हैं और आठों पद प्रभु श्री राम के अलग-अलग जीवन के चरणों को देखते हैं।यदि आप Hanuman Ashtak lyrics खोज रहे हैं, तो यहाँ आपको पूरा शुद्ध पाठ और उसका सरल अर्थ मिलेगा।तो चलिए हम अपने मन में एक बार पवित्र भाव से जय सियाराम कह कर हनुमान अष्टक के पाठ की शुरुआत करते हैं ।
हनुमान अष्टक(Hanuman Ashtak) का पाठ
कठिन समय में Hanuman Ashtak पाठ एक शक्तिशाली उपाय माना जाता है, जो हर संकट को दूर करने में सहायक होता है।नियमित Hanuman Ashtak पाठ करने से व्यक्ति को बल, साहस और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
।। दोहा। ।
बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो।
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहां पगु धारो।
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो।
चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो।
जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
काज किए बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
।। दोहा। ।
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।
जय श्रीराम, जय हनुमान, जय हनुमान।
हनुमान अष्टक(Hanuman Ashtak) का अर्थ
इस लेख में हम आपको Hanuman Ashtak meaning सरल भाषा में समझाएंगे, जिससे आप हर चौपाई का गहरा भाव जान सकें।नियमित रूप से हनुमान अष्टक पाठ करने से मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
एक बार हनुमान जी बचपन में थे, तभी सूरज को मुँह में डाल लिया। पल भर में तीनों लोक अँधेरे में डूब गए। कोई भी इस घटना का हल नहीं ढूंढ पाया। देवता एक-एक कर आए, उन्होंने विनती की, फिर हनुमान ने सूर्य को छोड़ दिया। उस दुख से सब मुक्त हुए। आज भी दुनिया में कौन है, जो यह न जाने कि हनुमान का नाम संकट मोचन है
पहाड़ पर सुग्रीव रहते थे, बालि के भाई। एक बार राम-लक्ष्मण को जाते देखा, तो डर गए – लगा, बालि का भेजा कोई योद्धा आया है। फिर हनुमान ने ब्राह्मण बनकर प्रभु राम को पहचाना। वही मिलाप सुग्रीव की दोस्ती की शुरुआत बना। आज भी, दुनिया में कौन है जो न जाने कि तुम्हारा नाम संकट मोचन है। रावण ने धमकी दी थी - सबको मार डालेंगे। अंत में समुद्र किनारे से कूदे, सीता का पता लगाया, और लौटे। उसी खबर से सबके जीवन बचे। आज भी, दुनिया में कौन है जो न जाने कि तुम्हारा नाम संकट मोचन है
एक दिन रावण ने सीता जी को डराया, फिर उनके भाइयों को दिखाकर घबराहट बढ़ा दी। उधर, राक्षसियों ने घेर लिया, बीच में हनुमान जी पहुंचे, बड़े-बड़े राक्षसों को धराशायी कर दिया। अशोक वाटिका में सीता जी ने पेड़ से आग मांगी, तभी छाया से एक अंगूठी गिरी। वो थी श्री रामचंद्र की, जिसे पाकर सीता का मन हल्का हो गया। इस धरती पर कौन ऐसा है जो न जानता हो कि तुम्हारा नाम संकट मोचन है ।
एक बार मेघनाद ने लक्ष्मण पर प्रहार किया, घाव गहरा हुआ, जान खतरे में पड़ गई। फिर द्रोणाचल पहाड़ के साथ संजीवनी लाए गए, इससे लक्ष्मण की जान बची। दुनिया में कौन है जो न जाने कि तुम्हारा नाम संकट मोचन है ।जब रावण ने युद्ध में सभी को फँसा लिया, तो रघुनाथ के साथ सारे सैन्य में भय छा गया। ऐसा लगा, अब कोई रास्ता नहीं बचा। उसी वक्त गरुड़ को लाकर तुमने बंधन तोड़वा दिए, संकट टल गया। इस धरती पर कौन नहीं जानता कि तुम्हें संकट मोचन कहते हैं।
अहिरावण, रावण का भाई, जब राम और लक्ष्मण को पकड़कर पाताल लोक ले आया। फिर उसने बली और समर्पण करने के लिए विधिपूर्वक पूजा शुरू कर दी । एकदम अचानक हनुमान जी वहाँ आ पहुँचे। मदद करने के बाद उन्होंने अहिरावण को सेना समेत खत्म कर दिया।
किसी भी कोने में रहने वाला इंसान यह बात नहीं जानता होगा कि हे कपि, आपका नाम संकटमोचन पड़ा है - जो हर मुश्किल को खत्म कर देते हैं।
कौन नहीं जानता है कि हनुमान जी ने कई बड़े देवताओं के काम पूरे किए? हे वीर महाप्रभु, आपके बारे में यह बात सब सुनते आए हैं।
क्या कोई मुश्किल ऐसी है मेरे संग, जिस पर आपका हाथ न पड़े?
तुम्हारे आगे झुकता हूँ, हनुमान जी। सब तकलीफें अब खत्म कर दो।
कौन नहीं पहचानता आपके ‘संकटमोचन’ नाम को, इस दुनिया में?
लाल रंग में डूबा हनुमान जी का शरीर, झिलमिलाती आभा के साथ खड़े हैं। उन पर चढ़े कपड़े भी आग जैसे लाल हैं, दृश्य ऐसा मानो अग्नि के बीच उषा खड़ी हो।
वो जिसका बदन हीरे-सा मजबूत है, उन दानवों को खत्म कर देते हैं।
तुम्हारी जय में कई बार गूँजे, हे बलवान हनुमान।
हनुमान जी पूजा विधि
Step-by-step guide.
Hanuman puja vidhi को सही तरीके से करने पर भक्तों को विशेष फल प्राप्त होता है।
दिन की शुरुआत, सुबह प्रातः काल उठकर करे स्नान स्नान ध्यान, इत्यादि करे
स्नान करने की सुविधा अगर आरामदायक हो तो लाल कपड़े धारण करें क्योंकि लाल हनुमान जी का प्रिय रंग मन जाता है
आप पूजा स्थल को शुद्ध करें उसके साफ-सफाई अच्छे से करें और सफाई हो जाने के बाद ंगाजल छिड़ककर पवित्र बनाएं
अब पूजा स्थल पर एक लड़की की छोटी सी चौकी रखें
चौकी पर लाल अथवा पिला कपड़ा बिछाए और उसके ऊपर अक्षत यानी, कच्चे चावल से अष्ट कमल यानी आठ पंखुड़ियां वाले कमल की आकृति बनाएं।
अब गणेश जी की सबसे पहली स्थापना करें क्योंकि गणेश जी हैं प्रथम पूज्य हैं उन्हें मौली दूर्वा इत्यादि चढ़ाएं और राम दरबार की स्थापना करें
7. संकल्प
दाहिने हाथ में जल, अक्षत (चावल) और पुष्प लें
मन को शांत करें और हनुमान जी का ध्यान करें
संकल्प मंत्र
मम उपात्त समस्त दुरितक्षयद्वारा
अहं (अपना नाम) (अपना गोत्र)
श्री हनुमत्प्रीत्यर्थं पूजनं करिष्ये।
अर्थ (सरल हिंदी में)
मैं (अपना नाम और गोत्र बोलें), अपने सभी पापों के नाश और
हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए
यह पूजा करने का संकल्प लेता/लेती हूँ।
हनुमान जी राम भक्त हैं, इसलिए सबसे पहले भगवान राम की पूजा करें उन्हें गंगाजल वस्त्र भोग इत्यादि चढ़ाएं और नमस्कार करें।
अब हनुमान जी के चित्र पर गंगाजल अर्पण करें उन्हें पुष्प पुष्प आदि सारी चीजें अर्पण करें उन्हें भोग लगाएं आगे हम यह भी देखेंगे कि हनुमान जी के कुछ-कुछ पसंदीदा भोग कौन से हैं
प्रिय भोग
लड्डू
केला
गुड़
खीर
अब आप अपनी सुविधा अनुस|र हनुमान अष्टक, सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। एक माला पंच माला या 108 माला।
यह ध्यान रखने की हो सकती है कि शुरुआत में आपको समय ज्यादा लगे पर आप जैसा जैसा अभ्यास करते जाएंगे वैसे सब वैसे समय कम रखना पड़ेगा और भाव शुद्ध होना अति आवश्यक है।
8. क्षमा प्रार्थना
पूजा के अंत में अपनी गलतियों के लिए क्षमा माँगें
मंत्र:
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव! परिपूर्णं तदस्तु मे॥
अर्थ:
हे भगवान! मुझे मंत्र, विधि और भक्ति का पूर्ण ज्ञान नहीं है, फिर भी मैंने श्रद्धा से पूजा की है। कृपया इसे स्वीकार करें और मुझे आशीर्वाद दें।
ऊपर दिए गए क्षमा मंत्र को पूजा खत्म होने के बाद रूप से पढ़ें जिसे आपकी गलती जिस्म इस मंत्र का से हम अपनी गलतियों की क्षमा मांगते हैं।
यदि आपको पूजा करने में कोई दिक्कत आ रही है या आप कहीं समझ नहीं पा रहे हैं तो वैदिक विधि के अनुसार शास्त्र संवत पूजा करने के लिए यह अभी पंडित जी से संर्पक करें।
Hanuman Ashtak benefits
कहा जाता है कि Hanuman Ashtak में सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह हर प्रकार के भय और संकट को दूर करता है।
यदि आप Sankat Mochan path नियमित रूप से करते हैं, तो जीवन की बाधाएँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
कई लोग Hanuman ji ke upay अपनाकर अपने जीवन की परेशानियों को कम करने का प्रयास करते हैं।
प्रतिदिन Hanuman Ashtak पाठ करने से मन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”







